कुछ तुम संभल जाओ,
कुछ मुझे भी होश आए
समंदर किनारे सुकून से बैठना क्या,
तूफान आए तो थोड़ा जोश आए
गिला किस्मत से क्या अब भी ना करुं,
मेरे हिस्से ही सारे एहसान फरामोश आए
बड़ा हंगामा मचा रखा था किसी ज़माने में,
जब उनकी दुनिया से लोटे तो बहुत खामोश आए
क्या गंवा दिया ये हिसाब मेरे जाने के बाद करना,
तुम मदहोश हो सकते थे मगर कमबख्त बेहोश आए
वो 'उसका' है
ये एहसास दिलाता है मुझे,
अगर मेरा है तो मेरी आगोश आए-

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