तुम्हे यूं खुश भी रहना है...
तुम्ही को मात खाना है....
तुम्हे फिर भोर की खातिर...
शबों से जीत जाना है...
कभी पत्थर.. कभी कांटों सी ये दुनिया,
तुम्ही को मोम बनना है.. तुम्हे इक गुल खिलाना
है...
टीस उठती रहे तो जिंदा रहोगे तुम,
अश्कों के गीतों को तुम्हे ही गुन गुनाना है,
आवारगी को थाम कर अपनी,
तुम्हे इक घर बसाना है,
तुम्हे अंधेरो का डर सताता है,
तो तुम्ही को दीए जलाना है,
तुम्हे तुमसे बेहतर कोई और ना समझेगा,
भरोसा खुद पे करना है... खुदी को खेल जाना
है...
दर्द लाख दे कोई मगर जवाब बस ये हो,
उसकी आंखों में जाना है.. और तुम्हे बस
मुस्कुराना है..
पूरी उम्र गुजरेगी इसी जुस्त-ओ-जू मे तुम्हारी,
तुम्हे इतना समझना है कि बस इक लम्हा बिताना
है...
खवाबों की बातों को हकीकत में बदलना है,
तुम्ही को दौड़ना भी है.. तुम्हे उड़कर दिखाना
है...
भले ये आसमां छू लो मगर बस याद ये रखना,
के छू-करके तुम्हे फिर लौट आना है...
तुम्हे यूं खुश भी रहना है...
तुम्ही को मात खाना है....
तुम्हे फिर भोर की खातिर...
शबों से जीत जाना है...

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