बेहद खूबसूरत हैं तुम्हारी आंखें। कीमती नीलम
जैसी खूबसूरत आंखें... सुरमें से यूं तो रु-ब-रु बहुत कम होना पड़ता है इन्हे। मगर
जब सुरमें के तीखे कोनो से ये सज जाती हैं तो बेहद दिलकश लगने लगती हैं। तुम्हे
मालूम है क्या कि जब झुकती हैं ये आँखें तो लगता है मानो जन्नत पलकों पर आ गई हो।
जब बेबाक सी उठ जाती हैं तो जाने कितने दिल सहम जाते हैं।
तुम्हे खुद अपनी आंखें कभी पसंद नहीं आई। पलकों
के साए में मुद्दतों की थकान से सराबोर ये आंखें जैसे सुकून तलाश रही हों।
दर्द.... किसी खामोश दरिया की तरह ठहर सा गया हो इनमे। आंसुओं की शक्ल में अब इसने
सीमाओं का बांध तोड़ना भी छोड़ दिया है। ये दुनिया कभी जान ही नहीं पाएगी कि चमकती, थिरकती, महकती, बहकती, गिरती, संभलती इन आंखों में कितने ही ख्वाब दफ्न हैं। ख्वाब जो हकीकत की
कसौटी पर बेनुयादी और बेमतलब से निकले। मगर बिल्कुल सच्चे।
इन आंखों के कई और राज़ मुझे मालूम हैं।
तुम्हारे लबों को अपने लबों से सहलाते वक्त आंखें बंद हो जाती थी मेरी। मगर जब
खुलती तो एक नई दुनिया ही दिखती मुझे। सीधा तुम्हारी आंखों में झांकते हुए मुझे
खुद अपना होश भी ना रहता। एक पल में इतना कुछ बयां करते मैने पहले कभी किसी को
नहीं देखा।
इस कदर झकझोर देती तुम्हारी आंखें मुझे कि जी
में आता इनके सारे अधूरे ख्वाब पूरे कर दूं। कि मुझसे फिर कोई औऱ शिकायत ना रह जाए
तुम्हे। ये आंखें मुस्कुराएं। और कुछ इस कदर मुस्कुराएं कि बस ये दुनिया खुशगवार
हो जाए। इस ज़माने भर पर ये एहसान सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी आंखे ही कर सकती हैं।
एक दास्तां बयां करती हैं ये आंखें... जिसमें
मैं भी हूं कहीं... इन्हे सहलाता.. निहारता.. संवारता... ये आंखे बस एक उसी लम्हे
पर जाकर बंद हो जाती हैं और कम से कम एक अधूरे ख्वाब को पूरा होने से रोक देती
हैं। जिससे ये ख्वाब कभी टूट ना सके और तुम बार बार वही एक ख्वाब देख सको।
तुम्हारी इन आंखों के कैनवास पर जो भी तस्वीर
बनती होगी यकीनन वो खुशकिस्मत है। इसमें बसने वाले हर एक ख्वाब को जन्नत से कम कुछ
मिल ही नहीं सकता। बहुत सी दुआएं हैं इन आंखों में। बेहद मर्म एहसास हैं इनके दीद
का। एक शायर को बेहतरीन खयाल देती...
तुम्हारी आंखें बेहद खूबसूरत हैं।

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