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Thursday, February 27, 2014

...रखा है..

अपनी जुस्त-ओ-जूं अपनी शिद्दत में रखा है,
हमने खुद को सफर-ए-मोहोब्बत में रखा है,
तुम्हारी याद हर पहर का हिस्सा है हमारी,
अपने हर पहलू को इस कदर इबादत में रखा है,
शतरंज का खेल नहीं कि जिसमें हार-जीत हो,
दिल फिर दिल है कोई प्यादा नहीं जो सियासत में रखा है
हमने खुद को सफर-ए-मोहोब्बत में रखा है,

दिल-ए-पाक में रखना मामूली बात नहीं,
इस नापाक दुनिया से बचाकर तुम्हे जन्नत में रखा है,
खुशमिजाज़ी का लिबास ओढते हैं,
ज़माने को एक ज़माने से गफलत में रखा है,
किसी तबस्सुम में हिस्सा नहीं हो तुम,
तुम्हे बेशकीमती अपनी ग़मों की विरासत में रखा है
चाहत है मीरा को, रुकमणी को, सुदामा को,
मगर कृष्णको राधा ने अपने उन्स की रियासत में रखा है

हमने खुद को सफर-ए-मोहोब्बत में रखा है

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