खामोश रह के देखना...
यूं बुज़िदलों सा रेंगना...
आवाज को उंचा करो..
या मार दो या खुद मरो..
मगर इस धर्मयुद्ध मे,
प्राण हथेली पर धरो..
कब तक यही चलेगा राग...
जब तक जली है दिल मे आग....
इस आग को ना बुझने दो...
इस आग को ना मिटने दो..
ये आग ही तो जीत का प्रमाण है...
वो युद् से हटा रहे ...
वो युद्ध से डरा करे..
गर जीत से बड़े ही उसको प्राण हैं...
जीत से तू आगे बढ़...
हार की तू छाती चढ़....
कुछ इस तरह से जीत ले...
कि हार को भी भय लगे...
आंखों मे ऐसे आंख डाल...
आखे ऐसी लाल लाल...
जिनमे गूंजता हुआ हो....
इक सवाल इक सवाल...
क्यूं जान लूं मै उसकी जिसने मुझे पैदा किया...
क्यूं मार दूं उसे कि जिसके साथ मै पला-बढ़ा..
क्यूं इंसानियत को त्याग दूं..
क्यूं अपनो हीं को आग दूं....
बस यही सही है जान ले...
इस सत्य को पहचान ले..
झूठ है ये दुनिया भी...
जो सत्य भागवत का है...
उस सत्य को तू मान ले...
by kReative krish http://www.facebook.com/pages/KReative-krish-httpbdkismatblogspotcom/219092168111171
by kReative krish http://www.facebook.com/pages/KReative-krish-httpbdkismatblogspotcom/219092168111171

No comments:
Post a Comment