आंखों में आंखें डाल उसे अपने पास बिठाते हुए,
मैं डूबा उसकी आंखों मे, वो बैठी मुस्कुराते हुए,
मैने इशारा किया तो वो शरमाई,
अपने दांतों से होंठों को दबाते हुए,
वो डरी हुई शरमाई सी लड़की,
जाने की जिद्द करती थी बार-बार घड़ी दिखाते हुए,
मैने थामा उसे, रोका उसे, देखा उसे,
और खामोशी का एक दौर निकला दिल दहलाते हुए,
फिर चांदनी रात जैसे चमकते माथे पे,
मैने चूमा उसके रुखसारों को सहलाते हुए.

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