...उतनी नहीं है।
एक नेता जी ने अपना भाषण सुनाया ,
जिसे सुनकर हमारा माथा चकराया,
आप भी इस भाषण का आनंद उठाइए,
अगली पीढ़ी को इनसे बचाइए,
माना के देश में भ्रष्टाचार है,
आम आदमी भी बड़ा लाचार है,
देश के हालात कुछ अच्छे नहीं,
उसपे मंदी की भी मार है,
“मगर परेशानी जितनी थी, अब उतनी नहीं है...”
आतंकवाद सिर चढ़कर बोल रहा है,
घूसखोरी का बाजार भी अपना मुंह खोल रहा है,
फिर भी मेरी मानो तो हालात बिल्कुल सही है,
“परेशानी जितनी थी, अब उतनी नहीं है,
कालाबाजारी का कुछ ये हाल है,
कि दुकानदार किलो को भी पाव में तोल रहा है...”
बेरोजगारी बढ़ रही है,
मंहगाई आसमान चढ़ रही है,
सार्स और स्वाइन फ्लू तक तो ठीक था,
अब तो जनता नेता नामक बिमारी से भी लड़ रही है,
“फिर भी हमीं को वोट दो”
ये बात नेता जी ने कही है,
“परेशानी जितनी थी अब उतनी नहीं है...”
डवलपमेंट धीरे-धीरे हो ही रहा है,
1 BHK का दाम 25 लाख से शुरु हो रहा है,
सिनेमा में अश्लीलता इस कदर बढ़ गई,
ना जाने अपना कल्चर कहां खो रहा है,
“मगर जो वक्त के साथ ना बदले,
वो कल्चर ही नहीं है,
परेशानी जितनी थी अब उतनी नहीं है...”
-खुशकिस्मत कृष्ण

RAAJNITI ME MEETHI CHURI CHALTI H, YE SAB JANTE HAIN... MAGAR SAMAJHTE NHI HAIN,,, YAHI SAMJHANE KA PRAYAS HAI...
ReplyDeletenyc way to tell ki humare INDIA ka kya haal hai......i really appreaciate it
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