Follow @kReativekrish kReative krish: February 2014

Thursday, February 27, 2014

रोज़ एक नया आग़ाज़ करते रहो..

एहसासों को नज़रअंदाज़ करते रहो,
रोज़ एक नया आग़ाज़ करते रहो..

ज़िंदगी तमाम कट ही जाएगी,
रिश्तों को लिबास करते रहो...

मुझे ग़ुरुर है अपने दीवानेपन पर,
तुम बस समाज-समाज करते रहो...

कुछ पाना है तो बगावत को हौसला भी करना,
वर्ना फिर सबकी तरह रिवाज़-रिवाज़ करते रहो...

इसमें नहीं होता नफा नुकसान का कायदा,
तुम मोहोब्बत ना करना बस हिसाब करते रहो...

ये 'कृष्ण' अंधेरा भी दूर होगा ज़िंदगी से तुम्हारी,

तुम बस चिराग चिराग करते रहो...

मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है

बेबाक तेरी अदाओं से है,
तेरी खुशबू में सराबोर हवाओं से है,
बेख़बर तेरे ख्बावों के कारवां से है,
तेरे बेतरतीब बिखरे हुए जहां से है,
तेरी आंखों के आइने में बसे खुद से है,
या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है
अल्लहड़ तेरे बाकपन से है,
अब से है या बचपन से है,
तेरी खुदगर्ज़ी से है.
या मुझे अपनी मर्जी से है,
रूह से है कि बुत से है,
या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है
तेरी खामियों से है,
छोटी-मोटी बेमानियों से है,
तेरी अदावतों से है,
कुछ बगावतों से है
तेरे सच से है तेरे झूठ से है,

या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है

अक्सर एक स्वैटर बुना करती थी वो.

अक्सर एक स्वैटर बुना करती थी वो.
अरे! दूध उबल गया,
वो ऊन का गोला हाथ में समेटे दौड़ पड़ती थी,
रास्ते में ही छूट भी जाता था वो गोला हाथ से,
सब उलझ जाता था..
जिसे सुलझाने में घंटो बीत जाया करते थे उसके,
मगर वो सुलझाना पसंद था उसे...
अक्सर एक स्वैटर बुना करती थी वो.

सहेलियां बहुत सी थी उसकी,
धूप में अकसर चारपाई पर बैठकर गप्पे मारा करती थी,
दोनो हाथ स्वैटर बुनते रहते और हज़ारों बातें चलती,
हाथ मानो किसी कंप्यूराइज़्ड प्रोग्राम की तरह हों,
बीच-बीच में मूंगफली के छिलके उतारने के लिए,
सिलाई बगल में रख दिया करती थी और फिर,
वही गप्पें.. वही हंसी.. वही बातें.. वही स्वैटर...
अक्सर एक स्वैटर बुना करती थी वो.

वो स्वैटर... कभी पूरा नहीं होने दिया उसने वो स्वैटर...
जैसे ही पूरा होने लगता.. उधेड़ देती...
फिर नए सिरे से बुनाई की शुरुआत...
अजीब पागल थी..
मगर उसे पसंद था वो पागलपन...
उसे पसंद था वो स्वैटर... उसके लम्स (छुअन) का एहसास...
वो स्वैटर किसी के इंतज़ार की निशानी था..

अक्सर एक स्वैटर बुना करती थी वो...

just a poem

"This relation has no name,
This is not a fucki’n game,
There is no future,
There is no one to blame,

Let’s forget d moments we used to share,
The love, the chemistry, the passion, the care,
Why I always have to explain,
Sweetheart, no it’s not fare

It's like your fairy tales come true,
There is a prince and a princess like me and you,
I wanna make you feel,
But How? I have no clue

We haven't ever met, yet…
This is d only truth and u have to accept,
I’m tired of the excuses you give,
We have right to be happy if not honest

Words are beautifully synchronizing,
Written for you and you must be smiling,
But if you don’t feel it,

This poem is just about rhyming"

Everyday I want to be you

Keeping dreams alive,
Everyday I wakeup,
I compete, I excel
I imitate you to match-up
Want to be in your shoe,
Everyday I want to be you

The way you fight,
The way you take everything light,
The pain you bear,
Your resistance to fear,
I’m a kiddo, I crumble,
You’re mature, You’re responsible
I don’t want to screw, whatever I do
Everyday I want to be you…

You’re my inspiration,
You’re my role model,
You’re my best critic,
Your appreciation is my laurel…
I always lie to you but this time it’s true

Everyday I want to be you…

दिसंबर की हवाएं

"उसे हौंसलों का सहारा दिया,
वो मुसाफिर जब कभी थकने लगा

उसके दिल का कांटा था तो निकाल दिया,
वो रिश्ता जब कभी चुभने लगा,

बिछड़ने की बात पर राज़ी हुए दोनों जहां,
फासला बढ़ता रहा दिल कहीं दुखने लगा,

मेरी आंखों को मुद्दत से लत लगी हुई थी उसकी,
अब उसकी आंखों में भी मुझे एक ख्वाब दिखने लगा,

एक लंबी जंग के बाद खामोशी पसरी है चारो तरफ,
दोनो का काफिला चलने लगा रुकने लगा

दिसंबर की हवाओं के हिस्से हैं बस बद्दुआएं,

कुछ सोचकर ये सर्द दिल फिर से दहकने लगा"

वो

बहुत सवाल करता था वो,
वो भी फिज़ूल के,
बक-बक करना तो आदत थी उसकी,
दुनिया भर की बातें करता था,
तंग आ जाती थी कभी कभी मैं...
खामोशी...
अब खामोशी छाई है तो परेशां क्यूं हूं...

अजीब शौक था उसको,
मेरी तस्वीरं जमा करने का,
जब भी मुलाकात होती,
वो कैद कर लेता मेरी परछाई,
वो मुझे बताता था कितनी खूबसूरत हूं मैं,
मैं फिर आइने में खुदको देखने लगी थी,
उसका हर लफ्ज़ मुझे खास बना देता था,
शर्म आने लग जाती थी मुझे और पूछती खुद से,
क्या मैं सच में परियों के देश से हूं...
खामोशी...
अब खामोशी छाई है तो परेशां क्यूं हूं...

ज़ि्द करता था वो,
कुछ समझने को राज़ी ही नहीं,
मैं लड़की हूं... कई बंदिशें हैं मुझपर,
वो मेरी एक नहीं सुनता,
बच्चों की तरह... बस लड़ना होता था उसे मुझसे,
मुझे बेहद पसंद थी उसकी लड़ाईयां,
मैं आखिरात में हार मान लेती,
फिर लगता कि उसकी ज़िद ही बड़ी मासूम है,
खामोशी...

अब खामोशी छाई है तो परेशां क्यूं हूं...

वो रात


"सांसों में घुलती हुई सांसों का नशा,
गर्म हथेलियां बर्फीली उंगलियों को पिघलाती हुई,

एक एहसास को वो लंबी रात खुद में संभाले,
दो रूहें एक चादर में अपना जहां बसाती हुई,

सन्नाटे की खामोशी में आहों का सफर,
दिल की चाहतें जिस्म में कमसमसाती हुई,

ग़मों के कारवां की मंज़िल वो आगोश,
टूटकर उसकी बाहों में खुदको समाती हुई,

सबुह-सबुह वो उसका हसीं उखड़ा मिजाज़,
बड़ी मासूम लगती वो बिस्तर पर टूटी हुई चूड़ियां दिखाती हुई

ना बिखरे बाल, ना फैला काजल, ना बेतरतीब सिंदूर,

बस उसकी आंखें दिसंबर की उस रात के राज़ बताती हुई"

कुछ तुम संभल जाओ

कुछ तुम संभल जाओ,
कुछ मुझे भी होश आए

समंदर किनारे सुकून से बैठना क्या,
तूफान आए तो थोड़ा जोश आए

गिला किस्मत से क्या अब भी ना करुं,
मेरे हिस्से ही सारे एहसान फरामोश आए

बड़ा हंगामा मचा रखा था किसी ज़माने में,
जब उनकी दुनिया से लोटे तो बहुत खामोश आए

क्या गंवा दिया ये हिसाब मेरे जाने के बाद करना,
तुम मदहोश हो सकते थे मगर कमबख्त बेहोश आए

वो 'उसका' है ये एहसास दिलाता है मुझे,

अगर मेरा है तो मेरी आगोश आए-

तुम्हारी आंखें


बेहद खूबसूरत हैं तुम्हारी आंखें। कीमती नीलम जैसी खूबसूरत आंखें... सुरमें से यूं तो रु-ब-रु बहुत कम होना पड़ता है इन्हे। मगर जब सुरमें के तीखे कोनो से ये सज जाती हैं तो बेहद दिलकश लगने लगती हैं। तुम्हे मालूम है क्या कि जब झुकती हैं ये आँखें तो लगता है मानो जन्नत पलकों पर आ गई हो। जब बेबाक सी उठ जाती हैं तो जाने कितने दिल सहम जाते हैं।

तुम्हे खुद अपनी आंखें कभी पसंद नहीं आई। पलकों के साए में मुद्दतों की थकान से सराबोर ये आंखें जैसे सुकून तलाश रही हों। दर्द.... किसी खामोश दरिया की तरह ठहर सा गया हो इनमे। आंसुओं की शक्ल में अब इसने सीमाओं का बांध तोड़ना भी छोड़ दिया है। ये दुनिया कभी जान ही नहीं पाएगी कि चमकती, थिरकती, महकती, बहकती, गिरती, संभलती इन आंखों में कितने ही ख्वाब दफ्न हैं। ख्वाब जो हकीकत की कसौटी पर बेनुयादी और बेमतलब से निकले। मगर बिल्कुल सच्चे।

इन आंखों के कई और राज़ मुझे मालूम हैं। तुम्हारे लबों को अपने लबों से सहलाते वक्त आंखें बंद हो जाती थी मेरी। मगर जब खुलती तो एक नई दुनिया ही दिखती मुझे। सीधा तुम्हारी आंखों में झांकते हुए मुझे खुद अपना होश भी ना रहता। एक पल में इतना कुछ बयां करते मैने पहले कभी किसी को नहीं देखा।

इस कदर झकझोर देती तुम्हारी आंखें मुझे कि जी में आता इनके सारे अधूरे ख्वाब पूरे कर दूं। कि मुझसे फिर कोई औऱ शिकायत ना रह जाए तुम्हे। ये आंखें मुस्कुराएं। और कुछ इस कदर मुस्कुराएं कि बस ये दुनिया खुशगवार हो जाए। इस ज़माने भर पर ये एहसान सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी आंखे ही कर सकती हैं।

एक दास्तां बयां करती हैं ये आंखें... जिसमें मैं भी हूं कहीं... इन्हे सहलाता.. निहारता.. संवारता... ये आंखे बस एक उसी लम्हे पर जाकर बंद हो जाती हैं और कम से कम एक अधूरे ख्वाब को पूरा होने से रोक देती हैं। जिससे ये ख्वाब कभी टूट ना सके और तुम बार बार वही एक ख्वाब देख सको।

तुम्हारी इन आंखों के कैनवास पर जो भी तस्वीर बनती होगी यकीनन वो खुशकिस्मत है। इसमें बसने वाले हर एक ख्वाब को जन्नत से कम कुछ मिल ही नहीं सकता। बहुत सी दुआएं हैं इन आंखों में। बेहद मर्म एहसास हैं इनके दीद का। एक शायर को बेहतरीन खयाल देती...


तुम्हारी आंखें बेहद खूबसूरत हैं।

ख्वाब

कुछ ख्वाबों को बस ख्वाब रखना चाहिए,
दिल को उतना ही बेताब रखना चाहिए,

जो सवाल करना ना जानते हों,
उन्हे अपने पास बहुत से जवाब रखने चाहिए

दोज़ग भी बन जाती है ज़िंदगी मोहोब्बत में,
जन्नत चाहिए तो दामन में कुछ सबाब रखने चाहिए

मेरी कीमत मुझे खुद नहीं पता,
तुम्हे मोल लगाना है तो आज से हिसाब रखना चाहिए

मोहोब्बत का क्या सबूत देगी ये भीगी हुई बारिश,

मेरी मानो तो आंखों में एक सैलाब रखना चाहिए-

बस आज एक दिन और...


खुलकर सांस लो,
रुह को चीखकर जगाओ,
फिर कभी नहीं होगा,
ना ये पल.. ना ये लोग.. ना ये ज़िदगी
अपने होने ना होने का एहसास दिलाओ
बस आज एक दिन और...

ज़िंदा हैं हम-तुम...
खूबसूरत है ये सफर,
ख्वाब खत्म नहीं हुए हैं,
कोशिशें बरकरार हैं,
तो खुलकर जीओ...
बस आज एक दिन और...

शुक्रिया जो साथ दे,
शुक्रिया जो आगे बढ़ चले,
शुक्रिया तजुर्बों का,
शुक्रिया एहसासों का,
शुक्रगुज़ार खुदा का...
बस आज एक दिन और...

कल की उम्मीद है,
कल खूबसूरत होगा,
कल जो बिछड़े हैं वो मिलेंगे,
कल यकीनन बेहतर होगा,
मगर कल तो कल ही होगा,
कल के लिए आज को मत खोने दो...
खुश रहो... तुम भी.. मैं भी...

बस आज एक दिन और...

I wanted to say

"I know it's not the right way,
but It's been a tiring day,
to be good, to make you proud,
all life, I used to pray
Dad! i used to pray!!!

but life is not an easy game,
you bet, it's hard to play,
I want to live in black or white,
but never in the shades of grey
Mom, i wanna meet you today!!!

Yes, I am the orion,
but you were never my prey,
differences ruin the relation,
like the stretch of the bay,
Friends, this is the real portrait,

Take the rose and feel my hug,
you'll know, I never wanted to betray,
The thing i'm hiding behind my back,
this rose is from that bouquet,
hey! hey! wait for a second,
don't leave me.. don't go away,
no matter when i leave,
no matter how long i stay,
I love you and i love you,
the last thing i wanna say

Love! Now, what you wanna say?"

.. हो तुम

"मुझे मोहोब्बत की तारीख से फर्क नही पड़ता,
मेरे करीब हो अगर तो वक्त भी तुम... समा भी तुम

मिलन भी होता है तो फकत बिछड़ने के लिए,
ये खुशी भी तुम.. वो सदमा भी तुम

मुझ पर और कितना इख्तियार चाहिए,
अब तो ये शरीर भी तुम.. आत्मा भी तुम...

उनके 'सवालों' का बस यही जवाब है मेरे पास,
कि ये शायरी भी तुम.. ये नगमा भी तुम

'उसका' भी फैसला आएगा कयामत के दिन,
फिल्हाल तो कचहरी भी तुम.. मुकदमा भी तुम...

जो मान लो तो ज़िदगी सौगात है,

वरना खुशनुमा भी तुम... बद्नुमा भी तुम"-

The Proposal


Time says it has come a long way,
 then why it feels like the first day,
I've grown fast in the past year,
but loving you has always been the last lear,
you own a part of my heart,
then why we have to stay apart,
we used to laugh on small things,
now we fight on even smaller things,
now there is so much pain
and we both have to sustain,
you have your own priorities,
I have my own stupidities,
I'm tired of my demands and your refusing,
our love is so confusing,
you want to get rid of my addiction,
what a silly superstition,
You can try erasing me,
you'll end-up chasing me,
you complete me that's what matter,
it's true that we were built together,
we both know it's not the new age love,
these memories I want to preserve,
we have nothing in our favour and still surviving,
with no future I don't know why are we trying,
but I love u cos I chose you,
and again i propose you,
if you say you are mine,

then will you be my valentine?

गुलाब

गुलाब यादों का, गुलाब बातों का,
गुलाब एहसास का, गुलाब प्यास का,
गुलाब कुर्बतों का, गुलाब फुर्कतो का,
गुलाब ख्वाबों का, गुलाब यादों का,
गुलाब खूबसूरत, गुलाब दिलकश

ये गज़लनुमा गुलाब एक सौगात समझकर रख लेना...

ये ना गुलाबी है तुम्हारे लबों की तरह,
ना ये नर्म है तुम्हारे बदन की तरह,
ना इसकी खुशबू तुम्हारी सांसों से लबरेज़ है,
ना इसमें कोई कशिश है तुम जैसी,
ना इसे अदाएं ही दिखाना आता है तुम्हारी तरह,

मगर एक सौगात है... इसे संजो लेना

कुछ वक्त बाद ये गुलाब सूखे पत्तों में तबदील हो जाएगा,
मेरा अक्स मगर उन सूखे पत्तो में साफ नजर आएगा,
तुम देख लेना जान’,
तुम जो कहती थी ये चार दिन की मोहोब्बत है
मुद्दतों बाद भी ज़िंदगी के सर्द थपेड़ों के बीच,
मेरे गुलाब की गर्माहटट तुम्हे ज़िदा रखेगी,
कुछ अश्क तुमेहारी आंखों से मेरी बेपनाह मोहोब्बत का सबूत देंगे,

एक नया गुलाब खिल उठेगा फिर

Love

Love is when you both know,
it's in the fingers and the toe,
when it makes you smile and cry,
you start dreaming to fly,
it is your smell... it is your sight,
it is the care... It is the fight,
it’s about the first kiss and the first touch,
you mean it when you say “I love you so much”,
it is beyond betrayal,
not confined to being loyal,
you wanna meet you wanna live together,
life gets better and better,
it is also in the lies,
when you don't wanna compromise,
when no one else can struck your mind,
the way a special face you always want to find,
it is when you go mad for not picking the call,
you never want to sound possessive at all,
you don't forgive you don't forget,
although you never ever regret,
it is when you know you have no right,
still you try to hold on tight,

and you keep loving with all your might…

.. तुम्हे


तुम्हे यूं खुश भी रहना है...
तुम्ही को मात खाना है....
तुम्हे फिर भोर की खातिर...
शबों से जीत जाना है...
कभी पत्थर.. कभी कांटों सी ये दुनिया,
तुम्ही को मोम बनना है.. तुम्हे इक गुल खिलाना है...
टीस उठती रहे तो जिंदा रहोगे तुम,
अश्कों के गीतों को तुम्हे ही गुन गुनाना है,
आवारगी को थाम कर अपनी,
तुम्हे इक घर बसाना है,
तुम्हे अंधेरो का डर सताता है,
तो तुम्ही को दीए जलाना है,
तुम्हे तुमसे बेहतर कोई और ना समझेगा,
भरोसा खुद पे करना है... खुदी को खेल जाना है...
दर्द लाख दे कोई मगर जवाब बस ये हो,
उसकी आंखों में जाना है.. और तुम्हे बस मुस्कुराना है..
पूरी उम्र गुजरेगी इसी जुस्त-ओ-जू मे तुम्हारी,
तुम्हे इतना समझना है कि बस इक लम्हा बिताना है...
खवाबों की बातों को हकीकत में बदलना है,
तुम्ही को दौड़ना भी है.. तुम्हे उड़कर दिखाना है...
भले ये आसमां छू लो मगर बस याद ये रखना,
के छू-करके तुम्हे फिर लौट आना है...
तुम्हे यूं खुश भी रहना है...
तुम्ही को मात खाना है....
तुम्हे फिर भोर की खातिर...

शबों से जीत जाना है...

चुनमुन का फूला पेट...

चुनमुन का फूला हुआ पेट देखा,
चेहरे पे नूर सिमटा हुआ था,
पहली बार शादी में साड़ी पहने देखा था उसे,
आज मैक्सी में देखा तो... आंसू झलक उठे.
मै 'नाना' बनूंगा ... ... खबर ही धांसू है,
अरे 'ना ना'.. ये तो खुशी के आंसू हैं,
अपनी बच्ची मानो कुछ अजूबा हो गई थी,
छुटकी कहती फूल के कुप्पा हो गई थी,
गुब्बारे में जैसे पानी भरा हो,
या हाथ से कोई गेहूं की बोरी को उठा लूं...
जाने कैसा होता होगा ये एहसास भी...
सब खुश हैं... मां भी.... सास भी,
अभी सातवां महीना ही लगा था...
मुन्नी या बाबू... नामकरण पहले ही हो गया था...
...
...
...
नींद खुली.. और आंखों से सपने फरार हुए,
भर गए आंसू...
एक भई खुशी का नहीं था... .
चुनमुन सामने थी.. फूला हुआ पेट लिए...

पिछले साल बलात्कार के करीब 4000 मामले दर्ज हुए...

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