एहसासों को नज़रअंदाज़ करते रहो,
रोज़ एक नया आग़ाज़ करते रहो..
ज़िंदगी तमाम कट ही जाएगी,
रिश्तों को लिबास करते रहो...
मुझे ग़ुरुर है अपने दीवानेपन पर,
तुम बस समाज-समाज करते रहो...
कुछ पाना है तो बगावत को हौसला भी करना,
वर्ना फिर सबकी तरह रिवाज़-रिवाज़ करते रहो...
इसमें नहीं होता नफा नुकसान का कायदा,
तुम मोहोब्बत ना करना बस हिसाब करते रहो...
ये 'कृष्ण' अंधेरा भी दूर
होगा ज़िंदगी से तुम्हारी,
तुम बस चिराग चिराग करते रहो...
