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Thursday, February 27, 2014

रोज़ एक नया आग़ाज़ करते रहो..

एहसासों को नज़रअंदाज़ करते रहो,
रोज़ एक नया आग़ाज़ करते रहो..

ज़िंदगी तमाम कट ही जाएगी,
रिश्तों को लिबास करते रहो...

मुझे ग़ुरुर है अपने दीवानेपन पर,
तुम बस समाज-समाज करते रहो...

कुछ पाना है तो बगावत को हौसला भी करना,
वर्ना फिर सबकी तरह रिवाज़-रिवाज़ करते रहो...

इसमें नहीं होता नफा नुकसान का कायदा,
तुम मोहोब्बत ना करना बस हिसाब करते रहो...

ये 'कृष्ण' अंधेरा भी दूर होगा ज़िंदगी से तुम्हारी,

तुम बस चिराग चिराग करते रहो...

मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है

बेबाक तेरी अदाओं से है,
तेरी खुशबू में सराबोर हवाओं से है,
बेख़बर तेरे ख्बावों के कारवां से है,
तेरे बेतरतीब बिखरे हुए जहां से है,
तेरी आंखों के आइने में बसे खुद से है,
या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है
अल्लहड़ तेरे बाकपन से है,
अब से है या बचपन से है,
तेरी खुदगर्ज़ी से है.
या मुझे अपनी मर्जी से है,
रूह से है कि बुत से है,
या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है
तेरी खामियों से है,
छोटी-मोटी बेमानियों से है,
तेरी अदावतों से है,
कुछ बगावतों से है
तेरे सच से है तेरे झूठ से है,

या मुझे प्यार सिर्फ तुझ से है

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