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Thursday, May 26, 2011

kuch alfaaz dil se


कुछ अलफाज़ दिल से...
"तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नहीं,
तेरे बिना मेरी ज़िंदगी की तस्वीर संवरती नहीं,
मैं आज भी उन्ही गलियारों में हूं,
मगर ना तू है, ना तेरी आवाज, ना तेरा साथ,
अब तो तेरी यादें भी मेरा दामन पकड़ती नहीं,
तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नहीं,
तेरी तस्वीर देखता हूं,
तेरी आंखे, तेरे होंठ तेरी हंसी ढ़ूंढ़ता हूं,
तेरी ज़ुल्फों पर नज़र जाते ही याद आता है
किस तरह से वो हल्की सी हवा से भी उड़ जोया करती थी,
आज तो ये कमबख्त तेज तूफानो मे भी लहरती नही है,
तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नही है"
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