Follow @kReativekrish kReative krish: May 2011

Tuesday, May 31, 2011

आज का इंजीनियर


आज का इंजीनियर
बाल ज़रा से लम्बे हैं, ना जाने क्यों लगते अचम्भे हैं,
शर्ट और टी-शर्ट को मिला कर कुछ पहना है,
बाली पहले लड़कियों का और अब इन लड़को का गहना है,
शॉटगन के जैसा DRAFTER अपने पास है और
सीनातान के कहते हैं हममे कुछ तो खास है,
MATRIX को जाना हमने PVR में देखने के बाद,
चार सप्ली अटक गई तो हर सीन आता है याद,
PRACTICAL FILE और WORKSHOP के बीच,
एक इंजीनियर का क्या हाल होता होगा,
ये सवाल अक्सर आपके ज़हन में आता होगा,
मगर प्रैक्टिकल फाइल के लिए दीदी को मना लेते हैं
नहीं मानी तो गर्लफ्रैंड से बनवा लेते हैं,
वर्कशॉप में हथौड़ा उठाने के ख्याल भर से मन मचलता है,
ATTENDANCE की चिंता नहीं, इनका काम तो PROXY से भी चलता है,
MECHENICAL में तो मानो गर्ल्स की एंट्री ही बंद है,
इनसे कुछ भी पूछो तो कहते हैं उंचे लोगों की ऊंची पसंद है,
हांथो में मोबाइल और कानों में लीड है,
इनका नारा डर के आगे ही तो जीत है,
ये लोग बड़े ही निडर है और किसी से नहीं डरते हैं
एक साथ आठ-आठ सप्ली के फॉर्म भरते हैं,
FINE CLEARANCE की भीड़ में घंटो खड़े रहते हैं,
ये कॉलेज क्या हमारे फाइन से चलता है,
बस इतना ही कहते हैं
DATE SHEET के चक्कर में ये नेट पर SEARCH करते हैं,
5 मिनट की सर्च के बाद कहेंगे,
सर्च छोड़ो CHATING करते हैं,
पूरे SEM की कड़ी मेहनत के बाद वो घड़ी भी आती है,
जिसमें CHEATING, फर्रे, फट्टे जैसी चीजे समाती हैं,
रात-रात भर EXAMS के बारे में सोचते हैं,
खुद की तैयारी है नहीं पर SMS से दूसरे की तैयारी पूछते हैं,
दोस्ती में यार दोस्त पर्चे फेंक देते हैं,
और ये कभी-कभी द्सरे के ANSWER के साथ,
उसका रोल नं. भी चेप देते हैं,
RESULT देखकर हैरानी में पड़ जाते हैं,
जो पेपर सही गया उसमें फेल और
जिसमें सोते रहे उसमें टॉप कर जाते हैं
इस, तरह से चार साल में एक ENGINEER बन लेता है,
आज का इंजिनियर तो कॉलेज में ही जीवन का हर पाठ पढ़ लेता है
                                                                        -kReative krish
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Sunday, May 29, 2011

ME- in a man


All  I love is the attention,
Otherwise it gives me frustration,
However, you feel it a little rude,
But this is all about my attitude,
‘I’m not the best’- u can’t assure me,
You can love me, you can hate me…
But you can’t IGNORE ME…

I’m good, I’m better… I am d best,
I keep walking when other take rest,
You call it my over confidence,
For me! It’s my self-defense,
I’m the wind, you can’t store me,
You can love me, you can hate me…
But you can’t IGNORE ME…

I love all; no one is my foe,
I’m all your from head to toe,
If you understand, I hate ignorance,
I never give anyone second chance,
If you surrender… you can explore me,
You can love me, you can hate me…
But you can’t IGNORE ME…

I don’t want to recall my past,
I want to forget it very fast,
Neither I’m a coward nor pessimist,
All I know is that god don’t exist,
If he is! Then why don’t he adore me,
You can love me, you can hate me…
But you can’t IGNORE ME…
by kReative krish

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Friday, May 27, 2011

yes! you are the one


yes u r d one,
its nt abt d face, inner beauty dat matters not d surface,
ur eyes, ur lips, ur cheeks & "dips", dey all r cool,
bt i fall for ur kind heart & beautiful soul,
coz u r d one...
u r above all,
u look so clean,
u r d princess of mah heart,
u r d girl of mah dream,
i cn take ur love, i cn take ur anger...
i cn take ur shout,
i cn take ur scream...
coz u r d one....
my luv z unconditional, it'l remain till d end,
love me only if u love me, bt just don't pretend,
sorry i can't die 4 u,
coz i wanna spend my life wid u,
just coz....
coz...
u......
r....
d....
one.... by kReative krish
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Thursday, May 26, 2011


"aaj zara fursat hai thoda pyaar karein yaar,
kal fir wahi hum, wahi tum aur wahi jung ka maidaan hoga...."

"jab aana hhi hai to poori tarah mere paas aaye,
mera pyaar kaaasey me padi khairaat nahi hai"
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"wo isi me khush hai ki usne gira diya mujhe,
usey maloom nhi m uske pairo taley zameen kheench lunga..."



"aaj moti hoon to keemat aasmaan chhooney lagi,
bada intezaar kiya hai ik boond kaa maine"



by kReative krish

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jeetna hai to yudh karo


खामोश रह के देखना...
यूं बुज़िदलों सा रेंगना...
आवाज को उंचा करो..
या मार दो या खुद मरो..
मगर इस धर्मयुद्ध मे,
प्राण हथेली पर धरो..
कब तक यही चलेगा राग...
जब तक जली है दिल मे आग....
इस आग को ना बुझने दो...
इस आग को ना मिटने दो..
ये आग ही तो जीत का प्रमाण है...
वो युद् से हटा रहे ...
वो युद्ध से डरा करे..
गर जीत से बड़े ही उसको प्राण हैं...
जीत से तू आगे बढ़...
हार की तू छाती चढ़....
कुछ इस तरह से जीत ले...
कि हार को भी भय लगे...
आंखों मे ऐसे आंख डाल...
आखे ऐसी लाल लाल...
जिनमे गूंजता हुआ हो....
इक सवाल इक सवाल...
क्यूं जान लूं मै उसकी जिसने मुझे पैदा किया...
क्यूं मार दूं उसे कि जिसके साथ मै पला-बढ़ा..
क्यूं इंसानियत को त्याग दूं..
क्यूं अपनो हीं को आग दूं....
बस यही सही है जान ले...
इस सत्य को पहचान ले..
झूठ है ये दुनिया भी...
जो सत्य भागवत का है...
उस सत्य को तू मान ले...
by kReative krish http://www.facebook.com/pages/KReative-krish-httpbdkismatblogspotcom/219092168111171

mai tanha jab bhi khud me khud ko samata hoon


mai tanha jab bhi khud me khud ko samata hu,
teri yadon ke ghero me khud ko anjaan btata hu,
teri yaadon se fursat ke chand pal talashne ki just-joon b hoti h,
mgr har baar khud hi se haar jaata hu,
mai tanha jab b khud me khud ko samata hu,
isi kashmakash me ki tera hoon b ya nhi zindagi ki shaam dhalne lagi h,
is shaam ko bhi ab mai khuley dil se galey lagaata hu.
mai tanha jab bi khud me khud ko samaata hu.
by kReative krish

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uski ek nazar


USKI EK NAZAR
wo ek taraf mai aur saamne wo...
apni gehri aankho se mujhko kuch bataati hui,
sehmi si.. logo ki nazaron se khud ko bachati hui,
fir chupke se meri taraf dekhti,
aur fir nazrein jhuka leti,
wo uski haya bhi thi wo uski ada bhi thi,
USKI EK NAZAR
jisme shaam ka ek sukoon hai,
jisme duniya badalne ka junoon hai,
jo mehekti h, thirakti hai,
machalti hai fir samhalti hai,
USKI EK NAZAR
wo uski muskartati nigahein,
mujhko kuch bataati nigahein,
woo mujhse kuch chupaati nigahein,
wo mujhse mujhi me samati nigahein,
meri aah hai, meri waah hai,
meri just-o-joo... mujhe kar rahi tabaah hai,
USKI EK NAZAR
by kReative krish
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aaj lafzo se kuch na keh


आज अपने सारे गुनाहो के धब्बे धोने दे,
मै क्या था मै क्या हूं मुझे याद नही,
मेरी तरह तू भी खुद मे मुझको खोने दे,
आज मेरे दर्द की इंतहां ना पूछ,
बस सिर कंधे पे रखकर रोने दे,
बहुत दिन हो गए सुकूं भरी नींद नही आई,
मुझे अपनी आगोश मे ले ले और सोने दे...
आज अपन सारे गुनाहों के धब्बे धोने दे

happy kiss day


आंखों में आंखें डाल उसे अपने पास बिठाते हुए,
मैं डूबा उसकी आंखों मे, वो बैठी मुस्कुराते हुए,
मैने इशारा किया तो वो शरमाई,
अपने दांतों से होंठों को दबाते हुए,
वो डरी हुई शरमाई सी लड़की,
जाने की जिद्द करती थी बार-बार घड़ी दिखाते हुए,
मैने थामा उसे, रोका उसे, देखा उसे,
और खामोशी का एक दौर निकला दिल दहलाते हुए,
फिर चांदनी रात जैसे चमकते माथे पे,
मैने चूमा उसके रुखसारों को सहलाते हुए. 

kuch alfaaz dil se


कुछ अलफाज़ दिल से...
"तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नहीं,
तेरे बिना मेरी ज़िंदगी की तस्वीर संवरती नहीं,
मैं आज भी उन्ही गलियारों में हूं,
मगर ना तू है, ना तेरी आवाज, ना तेरा साथ,
अब तो तेरी यादें भी मेरा दामन पकड़ती नहीं,
तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नहीं,
तेरी तस्वीर देखता हूं,
तेरी आंखे, तेरे होंठ तेरी हंसी ढ़ूंढ़ता हूं,
तेरी ज़ुल्फों पर नज़र जाते ही याद आता है
किस तरह से वो हल्की सी हवा से भी उड़ जोया करती थी,
आज तो ये कमबख्त तेज तूफानो मे भी लहरती नही है,
तुझपे जाकर ये नज़र कहीं और ठहरती नही है"
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shahadat


शहादत- जीत की कीमत..
हमारे सैनानियों ने हर बार हमें जीत दिलाई है,
बहादुरी की ना जाने कितनी ही मिसालें बनाई है..
ऐसी ही एक दास्तां आज मुझसे सुन लो...
मगर दिमाग से पहले जज़्बात को चुन लो,
उस वक्त सियासत का नंगा नाच चल रहा था...
जब मेरे देश का ताज जल रहा था,
तब उन्होने धीरज बांधा था...
देश की रक्षा के लिए उनका मजबूत कांधा था,
रणबाकुरों का जत्था यूद्धभूमि में कूद पड़...
सिंह की भांति दुश्मनों पे टूट पड़ा,
वो डटे रहे क्योंकि देश रो रहा था..
आगे बढ़ते रहे जब देश सो रहा था..
गोलियों पे गोलियां चलती रहीं..
परिस्थितियां पल-पल बदलती रहीं...
एक बार तो मां की चिंता हुई होगी...
एक बार तो पिता की तस्वीर दिखाई दी होगी...
शायद बच्चों का ख्याल आया हो...
हो सकता है माशूका ध्यान आया हो...
मगर ये जज़्बा ही है जो इन्हे जांबाज़ बनाता है...
सिपाही पूरे देश को परिवार समान गले लगाता है....
आतंकियों के सामने इन वीरों की दीवार थी...
इस बार की लड़ाई आर पार थी...
धमाको पे धमाके हो रहे थे,
आतंकी भी अपना धीरज खो रहे थे,
एक सिपाही बड़ी बहादुरी से लड़ रहा था,
देश रक्षा का फर्ज बखूबी अदा कर रहा था,
वो आगे बढ़ता रहा मानो दुश्मनो का काल हो,
गुस्मे में उसकी आंखे मानो गर्म लोहे सी लाल हों,
वो आतंकियों से लड़ते लड़ते उनके करीब चला गया,
एक-एक आतंकी को मारता चला गया,
अचानक एक ऐसा वक्त भी आया,
मानो मौत सा काला... घुप्प अंधेरा छाया,
पीठ पीछे उसपे आतंकी ने गोली दागी,
जो की तेजी से सिपाही की तरफ भागी,
गोली उसके सीने में घुस गई,
दिल के किसी कोने मे छुप गई,
एक पल में क्या से क्या हो गया,
देश का एक सपूत मौत की नींद सो गया,
वो सिपाही देश को अखिरी सलाम दे गया,
साथ ही आतंकियों के अंत का पैगाम दे गया,
आखिरकार हमारी जीत भी हो गई,
मगर मेरा दिल मुझसे एक सवाल पूछ रहा है,
जिसका जवाब मुझे नहीं सूझ रहा है,
आखिर क्यूं सिपाही को ही क्यूं ये कीमत चुकानी पड़ती है,
जीत की कीमत शहादत से ही क्यूं चुकानी पड़ती है,
                                                                         कृष्ण पांडेय...

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