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Sunday, January 24, 2010

KLPD

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दिलबर... जान... सनम... तो कभी जानम कहा करता था,

दिन-रात उसके खयालों में डूबा रहता था,

उसकी हर मुस्कान से दिल पर कहर सा ढा जाता था,

मुझे क्या पता था ये बकरा हलाला होने से पहले पुचकारा जाता था,

क्या बताऊं क्या माल थी वो,

कहने का मतलब कमाल थी वो,

याद करता हूं वो किस तरह से पटी थी,

बड़ी मुश्किलों से सैट हुई थी,

उसके हुस्न पर हमने कई कविताएं लिख डाली थी,

क्या खूब उसका यौवन, रुप और गालों की सुर्ख लाली थी,

जो भी लेटेस्ट गाना आया करता था,

दिन-रात हमारे मोबाइल में बजा करता था,

हर रोमेंटिक फिल्म की स्टोरी मानो अपनी ही लगती थी,

उसे किसी और के साथ देखता तो मेरी बड़ी सुलगती थी

बड़ी ही सात्विक थी वो मंदिर जाया करती थी,

हर सोमवार एक नई चप्पल पार कर लाया करती थी,

काफी शेरदिल थी वो किसी से नहीं डरती थी,

खुल्लेआम सुट्टे के कश भरती थी,

बस एक दिन वोडका के पैसे ना देने पर मुझसे रुठ गई,

उसी दिन से हमारी सैटिंग टूट गई,

पूरी ज़िंदगी इश्क को इबादत और दिलबर को खुदा कहता रहा,

जब से उसने साथ छोड़ा इश्क अब कमबख्त हो गया और

सनम को बेवफा कहने लगा..

इस महफिल में कई टूटे दिलों का दर्द हरा हुआ होगा,

सभी ने अपना हांथ सीने पर धरा होगा,

मगर अपने देश में दर्जन के हिसाब से दीवाने मिलते हैं,

हर घड़ी, हर मोड़ पर अरमानों के चमन खिलते हैं,

ये एहसास हमे KLPD के बाद हुआ है,

KLPD मतलब-Kई Lड़कियां Pटा Dआलने के बाद,

ये एहसास हमे कई लड़कियां पटा डालने के बाद हुआ है,

खुदा हर किसी को अपनी मोहब्बत से मिलाए यही बस दुआ है...

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