“घण्टा”
मंदिर में, बस में, सड़क पर सब जगह “घण्टा” है,
ये वो चीज़ है जिससे सभी का काम काम बनता है,
मगर फिर भी इसे गाली ही समझती जनता है,
अजी! ये मन्नत पूरी कराता है,
सोए हुए मुसाफिरों को जगाता है,
राहगीरों को राह दिखाता है,
जी ये “घण्टा” है....
कुछ बुरा हो जाए या फिर
लैक्चर से दिमाग पक जाए,
किसी पर गुस्सा आ जाए
तो जुबां से निकलने वाला
Common सा लफ्ज़ “घण्टा” है...
बिल्ली जैसे अफसर के गले में बंधना हो,
या फिर भगवान की प्रार्थना हो,
यारी-दोस्ती में किसी को कुछ कहना हो,
तो मौजूद “घण्टा” है...
हमेशा बजता रहता है,
किसी से कुछ नहीं कहता है,
सारे ग़म अकेले सहता है,
फिर भी कितना खुश दिखता है,
जी हां, भाईसाहब ये “घण्टा” है...
घण्टा हमे बहुत कुछ बताता है,
हर हाल में खुश रहना सिखाता है,
बिना जिसके हम अधूरे होते हैं,
जिससे हमारे कई काम पूरे होते हैं,
वो “घण्टा” है,
अगर आपको ये कविता अच्छी लगी तो आप “वाह” कहेंगे,
और अगर घटिया लगी तो...
आपके मुंह से भी निकलने वाला अगला शब्द “घण्टा” है...
-खुशकिस्मत कृष्ण

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