बस एक तुम्हारी मुस्कान ही सच्ची है,
ये नाते-ये रिश्ते, ये ज़िंदगी-ये बंदगी, ये प्यार- ये तकरार, ये तड़पना ये बिछड़ना, ये फूल- ये कलियां, ये मोहल्ले की चहकती गलियां, खुशियां या ग़म – कहीं ज्यादा तो कहीं कम, किसी की मोहब्बत तो किसी की इबादत... ये सब चोंचले हैं,
बस एक तुम्हारी मुस्कान ही सच्ची है,
दुनिया के ताने- ना आने के बहाने, वो रुठना-वो मनाना, दिल की एक बात-फिर से मुलाकात, वो सांसों का बढ़ना-सीने का धड़कना, बांहों में सिमटी खुशबू- वो नज़रों से गुफ्त-गू... ये सब तो चोंचलें हैं,
बस एक तुम्हारी मुस्कान ही सच्ची है,
तुम्हारी मुस्कान...
इसी में तो खुदा का अक्स है- इसके इंतज़ार में बैठा एक शख्स है, इसमें मासूमियत भी है- इसमें शरारत भी है, इसमें हया भी है-इसमें अदा भी है, इसमें ज़रा सा भी ना गुरुर है- इसमें रब का हसीं नूर है,
तुम मुस्कराते हुए कुछ ऐसी लगती हो...
मानो इबादत में बैठी एक छोटी सी बच्ची है,
बस एक तुम्हारी मुस्कान ही तो सच्ची है

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