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Wednesday, February 10, 2010

TUM

“तुम”
मुझे यकीं है मुझे चाहते हो तुम,
खुदा से दिन रात दुआओँ में मुझे मांगते हो तुम,
ना आऊं तुमसे मिलने एक दिन भी कभी,
तो बड़े ही बेचैन नज़र आते हो तुम,
रुठ जाने में हम तुम्हे भी मात देते थे,
आज भी हमे घंटो मनाया करते हो तुम,
तुम साथ होते हो तो सुकूं मिलता है दिल को,
दूर जाकर बड़ा सताते हो तुम,
साया बनकर मेरे साथ चलते हो,
खुशबू बनकर मुझमें समाते हो तुम,
मोहब्बत है तुमसे ये बताना है मुश्किल,
बस ये मसझ लो के उससे ज्यादा है,
जितना मुझे चाहते हो तुम,
मेरे आस-पास हर जगह बस तुम ही तुम हो,
आंखें बंद होने पर भी नज़र आते हो तुम,
मुझसे रू-ब-रू होते ही खामोश हो जाते हो,
मेरे जाने के बाद प्यार जताते हो तुम,
मैने जब भी अपने बारे में तुमसे पूछा,
हर बार अपनी जान बताते हो तुम...

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